दौर
एक दौर ऐसा आ गया,
कुछ मामला ऐसा हुआ।
बात कुछ बन रही,
वातावरण कुछ बदल रहा।
गिले-शिकवे भूल जाना,
प्यार कुछ जता जाना।
तड़प कर एक बार,
फिर गले से लग जाना।
अंधेरी रात है काली,
सुबह की लाली दूर अभी।
हवा का झोंका ज़हरीला अभी,
समय की नाव जर्जर अभी।
दीपक जला लो तुम अभी,
थोड़ी साँस भर लो तुम अभी।
उम्मीद का फुहारा बरसेगा,
सुबह होगी ज़रूर अभी।
रास्ते की तलाश करते अभी,
बहुत सी निगाहें उठती अभी।
दौर आएगा बदलते करवट,
कौन कहाँ थका है अभी?
सुखवीर सिंह
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