Saturday, 27 September 2014

तसव्वुर (TASAVVUR)-Imagination of Love


                    तसव्वुर



तेरे लबों का तबस्सुम तेरे चेहरे का सिंगार है,  
ख़ुदा भी इस मुखड़े  के दीदार को बेक़रार है

तेरे आने का तसव्वुर मचल जाता है ये दिल,
इस तिजारा ज़िन्दगी को मिल जाता क़रार है

दुनिया की निगाहें तुझे  खोजती  फिरती  हैं,
फिर भी  इस बात से मुझे क्या  सरोकार है

मैं  तो  तेरे  तसव्वुर में  ही  जी लेता  हूँ,
वरना तो मेरी खुशनुमा जिंदगी भी बेकार है

पहले का मरासिम तस्कीं  था  इस दिल को,
जब मिलें  तो  कहा कोई  और हमयार  है।

'सुखवीर' तसफ़ीया हो गया तू चल अपने रास्ते,
''तसव्वुर'' को तेरा नहीं किसी और का इंतजार है

Sunday, 14 September 2014

जुस्तजू (JUSTJU)

मेरी ख़ामोश निग़ाहों की बेबस आरज़ू,
पूरी ना हो सके ऐसी अलहदा  जुस्तजू।

दर-ओ-दीवार ज़माने से पूछता भटकता,
अलहदा दुनिया से मेरे आलम की जुस्तजू।

रूहानी आशिक़ों ने कहा ये क्या करता है तू,
अपने महबूब की नहीं कर ख़ुदा की जुस्तजू।

 किसी ख़ुदा की रहनुमाई का करू मैं क्या,
मुझे तो केवल है अपनी रूह की जुस्तजू।

ऐसी राहों पर न जा मेरी ए हमसफ़र,
कहीं वो न छीन लें मुझसे तेरी जुस्तजू


शब्दार्थ:
1.जुस्तजू =खोज ,तलाश 
2.अलहदा =अलग ,जुदा