तसव्वुर
तेरे लबों का तबस्सुम तेरे चेहरे का सिंगार है,
ख़ुदा भी इस मुखड़े के दीदार को बेक़रार
है।
तेरे आने का तसव्वुर मचल जाता है ये दिल,
इस तिजारा ज़िन्दगी को मिल जाता क़रार है।
दुनिया की निगाहें तुझे खोजती फिरती हैं,
फिर भी इस बात से मुझे क्या सरोकार है।
मैं तो तेरे तसव्वुर
में ही जी लेता हूँ,
वरना तो मेरी खुशनुमा जिंदगी भी बेकार है।
पहले का मरासिम तस्कीं था इस दिल
को,
जब मिलें तो कहा कोई और हमयार है।
'सुखवीर' तसफ़ीया हो गया तू चल अपने रास्ते,
''तसव्वुर'' को तेरा नहीं किसी और का इंतजार है।