Sunday, 22 December 2024

        तुम 


ख़ुद को बहकने से 

रोक नहीं पाता हूँ, 

दीदार जब तुम्हारा हो 

होश नहीं रख पाता हूँ। 


रास्तों पर चलते ही 

तुम्हारा ख़्याल आता है,

मिल जाओ गर तुम 

स्थिर नहीं रह पाता हूँ,

ख़ुद को बहकने से 

रोक नहीं पाता हूँ। 


परिचय क्या है तुम्हारा 

कभी जान ना पाया,

मिलती मगर जब तुम 

पूछ भी नहीं पाता हूँ,

ख़ुद को बहकने से 

रोक नहीं पाता हूँ।


गुफ्तगू की संभावना नहीं 

साथ कोई और तुम्हारे,

रोकता हूँ ख़ुद को 

संभल नहीं पाता हूँ,

ख़ुद को बहकने से 

रोक नहीं पाता हूँ।


तुम्हारे ज़ुल्फों की खुशबू 

तुम्हारे लबों की लाली, औ

हसीन आँखों में डूबने से 

रोक नहीं पाता हूँ,

ख़ुद को बहकने से 

रोक नहीं पाता हूँ।


एक और दीदार को 

दिन-दिन गिन रहा हूँ, 

शायद मिल भी जाओ तुम 

हिलोरें संभाल नहीं पाता हूँ,

ख़ुद को बहकने से 

रोक नहीं पाता हूँ।


ख़ुद को बहकने से 

रोक नहीं पाता हूँ, 

दीदार जब तुम्हारा हो 

होश नहीं रख पाता हूँ।


सुखवीर सिंह 




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