बेरुखी तेरी
बेहिसाब क़त्ल
जीना चाहता हूँ
तेरे संग
मुमकिन है शायद
आईने से अपने
गुफ्तगू करता
इंतजार में घूमता
खोजता अपना मुक़द्दर
आशाओं का झरना
मुमकिन है शायद
ख्वाबों का समन्दर
उफ़ान पर अपने
सहारे कि खोज में
तैरता दरबदर
साहिल कि तलाश
मुमकिन है शायद.....
Bht khoob Bhaiya
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